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ज़रा सुनिये

ज़रा सुनिये,

कभी कभी
एक लम्हा फुरसत का
एक अपनी हसरत का
एक अदद मुस्कराने का
अदना सा मेरे सपनों में आने का
निकाल लिया कीजिए.
और हाँ,
एक लम्हा बतियाने का
एक अपनी सुनाने का
एक अदद इबादत का
अदना सा मुझे शरारत का
दे दिया कीजिए.