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मैं और दु:ख़

आजकल मैं बहुत दु:खी हूँ
क्योंकि मैं करती हूँ प्रेम
एक साथ सबसे
अपने माता-पिता, भाई-बहनों
दोस्तों से, प्रेमी से
अपने आस-पास के गरीब-गुरबों से
सबसे एक साथ!
पहले मैं बहुत सुखी थी
जब मुझे किसी की परवाह नहीं थी
न माँ-बाप की, न भाई-बहनों की
न दोस्तों की, प्रेमी कोई था नहीं
गरीब-गुरबों को तब मैं
धूर्त और नीच समझती थी.
यहाँ तक कि खुद की परवाह नहीं थी मुझे!

मेरे दु:ख के कारण हैं
मेरे माता-पिता का अत्यधिक विश्वास
मेरे भाई-बहनों की उम्मीदें
मेरे दोस्तों की नासमझी
मेरे प्रेमी की अच्छाइयाँ
और गरीब-गुरबों से जुड़ी संवेदनाएँ.

मैं दु:खी हूँ
क्योंकि अब मैं
उस तरह कठोर नहीं हो पाती
अपनी संवेदनाओं के प्रति,
मैं दु:खी हूँ क्योंकि अब मैं
अपनी कमज़ोरियों के आगे कमज़ोर पड़ जाती हूँ
दूसरों के प्यार को सहजता से अपना लेती हूँ
क्योंकि मैं डिप्लोमैटिक होना नहीं जानती
क्योंकि मैं दु:ख से मुस्कुराना नहीं जानती!
मैं दु:खी हूँ क्योंकि
दूसरों से की उम्मीदें हमेशा टूटती हैं
दूसरों की उम्मीदों को मैं भी तोड़ती हूँ
आजकल मैं बहुत दु:खी हूँ.