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चुगलख़ोर सुर्ख गुलाब


चुगलख़ोर सुर्ख गुलाब

खोल गया मेरे सीने में दफ़्न राज़

यूं तो आंखों से छलकता था

तुमने देखा नहीं

होंठों पर थिरकता था

तुमने सुना नहीं

रोम रोम में उछलता था

तुमने छुआ नहीं

और चुगलख़ोर गुलाब ने

सब कह दिया!